शनिवार, 9 जुलाई 2011

ट्रैफिक सिग्नल पर भीख मांगते २१वी सदी के भारत के कर्णधार

शिक्षा लेने की उम्र में भीख मांगने की मजबूरी



रोज घर से कार्यालय जाते समय दिल्ली के नारायण फ्लाईओवर के पास ५-७ मिनट का ट्रैफिक जाम सामान्य सी बात है..मगर एक और घटना रोज घटती है जिसे हमने रोज लगते ट्रैफिक   जाम की तरह स्वीकार कर लिया है..वो है,इन्ही सिगनलों पर भीख मांगते कुछ अवयस्क बच्चे..मेरी भी दिनचर्या में कुछ ऐसा ही था,एक आँखों ही आँखों में अनकहा सा रिश्ता बन गया था इन बच्चो से,रोज मेरी कार वहां रूकती, कुछ जाने पहचाने चेहरों में से एक चेहरा मेरी ओर आता और मैं वहां के कई लोगो की तरह पहले से ही निकाल के रक्खे गए कुछ सिक्कों में से १ या २ उन्हें देकर दानवीर बनने की छद्म आत्मसंतुष्टि लिए आगे बढ़ जाता..

व्यस्तता के कारण कई दिन बाद कार्यालय जाना हुआ ..मगर आज एक नए चेहरे ने उसी जगह आ के हाथ फैला दिया रोज की तरह मैंने गाड़ी शीशे निचे करते हुए १ रूपये का एक सिक्का उसकी और बढ़ा दिया मगर नए चेहरे को देखकर अनायास ही निकाल पड़ा "नया आया है क्या?"बच्चा मेरी और देखता हुआ बिना कोई जबाब दिए सिक्का लेकर आगे बढ़ गया...