शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

लोकपाल,लोकतंत्र और भष्टाचार विरोधी आन्दोलन का असमय अवसान..

पिछले कई दिनों से संसद में धुमाचौकड़ी मची हुई थी लोकपाल पर ..सत्र शुरू होते ही अन्ना के प्रबंधक सक्रीय हो उठे थे और कांग्रेस सरकार पर भी लोकपाल बिल को पारित कराने का नैतिक और राजनैतिक दोनों दबाव बढ़ता जा रहा था...विपक्ष ने भी मौका देखकर सरकार की मिट्टी पलीद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रक्खी थी.. मगर जैसे ही कलेंडर ने ३० तारीख की और इशारा किया अन्ना हजारे और लाखों लोगो का सारा का सारा आन्दोलन पानी के बुलबुले की भांति फूट कर खत्म हो गया..अब जब एक आन्दोलन का असमय देहावसान हो गया तो ये हम सभी के आत्मविश्लेषण का समय है की आखिर इस सारी जद्दोजहद से आम हिंदुस्थानी ने क्या पाया?

हालाकि तुलना गलत होगी मगर इस आन्दोलन की असफलता मेरे मानस पटल पर  कभी कभी भारतीय स्वाधीनता संग्राम की १८५७ की असफल क्रांति  का काल्पनिक रेखाचित्र खिंच कर जाती है,जिसमें अनेक अग्निवेश जैसे दलाल पुरे आन्दोलन में इधर उधर मुंह मारते रहे और आन्दोलन के दो मुख्य स्तम्भ बाबा रामदेव और अन्ना हजारे एक दुसरे को लंगड़ी मारने में व्यस्त रहे और कांग्रेस रूपी ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने दमनचक्र चला कर सबको साध लिया.. 
दरअसल अप्रैल से अन्ना आन्दोलन के बाद ने ही कांग्रेस सरकार ने अपनी साम दाम दंड भेद अपनाकर अन्ना टीम की विश्वसनीयता लोगो के बीच खत्म करने का एक कुत्सित प्रयास शुरू कर दिया था...हालाँकि अन्ना के तथाकथित सेकुलर प्रबंधको का अति आत्मविश्वास भी उन्हें ले डूबा...ये वही अन्ना टीम है जिसका जनता से परिचय बाबा रामदेव ने कराया और उसके बाद इनलोगों ने लोकपाल आन्दोलन में बाबा को शामिल करने के लिए ढेर सारी शर्तों  का एक सेकुलर पिटारा खोल दिया.. खैर बाबा को जैसे तैसे भ्रष्टाचार विरोधी जनान्दोलन का श्रेय लेने से बहुत सफाई से किनारे कर दिया,ज्ञात रहें की ये वही बाबा रामदेव हैं जिन्होंने सालो से भ्रष्टाचार और कालेधन के विरोध में अभियान छेड़ रखा है..
कांग्रेस सरकार ने भी अग्निवेश जैसे दलाल अन्ना टीम में सक्रीय कर दिये जिन्होंने अन्ना टीम को रातो रात भारत के गाँधी और नेहरु बनाने का दिवास्वपन दिखा दिया..
४ जून को बाबा के आन्दोलन को निर्ममता से कुचल दिया गया और इस निर्ममता का जनाक्रोश अन्ना को दुसरे अनशन  में जनसमर्थन के रूप में मिला.जिसे अन्ना प्रबंधको ने अपने नेतृत्व क्षमता विजय के रूप में देखा..बाबा रामदेव के आन्दोलन को निर्ममता से कांग्रेस सरकार द्वारा कुचलने के बाद अन्ना जैसे भी थे एक उम्मीद की किरण के रूप में परिलक्षित होने लगे.मैं व्यक्तिगत रूप से(या मेरे जैसे लाखो हिंदुस्थानी) यही सोचते रहे की अन्ना दुसरे अनशन में अपार जनसमर्थन के बूते पर सरकार से कुछ न कुछ हासिल कर लेंगे इसी उम्मीद में सुबह से शाम अनशन स्थल पर पड़े रहे मगर परिणाम वही ढ़ाक के तीन पात..अन्ना टीम को गाँधी बनने का ऐसा चस्का लगा था की हर बार एक नए समझौते और भारत रत्न की आस लिए जूस पीते और जनता सर पिटते हुए फिर अपने घर..इसके बाद अन्ना टीम के उल जलूल निर्णय जैसे पहले नेताओं को मंच पर न फटकने देना फिर उनके घर घर जा के कटोरा फैलाना..कभी कश्मीर को हिन्दुस्थान से बाहर कर देना तो कभी कुमार विश्वास का हिन्दू देवी देवताओं का अपमान करना.. हिन्दुस्थान जैसे देश में कांग्रेस जैसी कुटिल देशद्रोही  सरकार को ९ महीने का समय देना एक आन्दोलन का पिंडदान करने के लिए पर्याप्त था और वही हुआ कांग्रेस से सुनियोजित तरीके लोकपाल बिल की हत्या कर दी और बाकी विपक्षी दलों ने भी प्रत्यक्ष तो कभी अप्रत्यक्ष कांग्रेस का समर्थन किया,क्यूकी पूरी राजनैतिक जमात जनता के गुस्से से घबरायी हुई थी और ये सब उस संसद और लोकतंत्र की गरिमा के नाम पर हुआ जिसमें अपराधियों,देशद्रोहियों और भारत का ८०% कालाधन रखने वालो की उपस्थिति पंजिका रक्खी जाती है..
अन्ना ने फिर अनशन किया मगर अबकी बार जनता फिर किसी मुगालते में नहीं आने वाली थी शायद अंदेशा था इस बार भी अन्ना टीम एक कांग्रेसी सेकुलर प्रेमपत्र दिखाकर उसपर अमल न किये जाने की सूरत में अगले अनशन की तारीख का शुभ महूर्त निकलवाकर सब हिन्दुस्थानियों को निमंत्रण भेजती..
मुंबई जो की अन्ना का गृहराज्य था वह इतनी भी भीड़ नहीं जुटी की अन्ना अपना अनसन ३ दिन तक भी रख पायें इसका कारण कांग्रेस के प्रति सहानुभूति न होकर अन्ना टीम से मोहभंग होना था..शायद जनता ने अपनी लूट को नियति मानकर, नयी अनशन की तारीख लेने की बजाय कुछ दिन और इस लूट को स्वीकार कर लेने का विकल्प चुना था 
अंततः इस आन्दोलन की विफलता से कांग्रेस को देश को लूटने की तात्कालिक आजादी और अन्ना टीम के प्रबंधको के लिए एक अच्छी खासी उर्वरा राजनैतिक जमीन बनाने का मौका तो मिला ही है..
मीडिया के कैमरों से दूर बाबा रामदेव,सुब्रमण्यम स्वामी ने अभी तक राष्टवाद और भष्टाचार मुक्त भारत का झंडा उठा रखा है,मगर सावन के सेकुलर अंधों को हरे से ज्यादा प्यार नजर आता है..एक सामान्य नागरिक की तरह यही उम्मीद है की शायद कांग्रेसी शासन के मकडजाल से कोई मुक्ति दिलाये और भारत में सच्चा लोकतंत्र स्थापित हो.....


मित्रों बधाइयों का दौर चलने वाला है कल से ,सेकुलर नहीं हूँ और अंग्रेज भी नहीं इसलिए ,मेरी तरफ से हिन्दू नव वर्ष(२३ मार्च २०१२ ) की अग्रिम बधाइयाँ..

रविवार, 18 दिसंबर 2011

पाकिस्तानी हिन्दुओं की हिन्दुस्थान में दुर्दशा -हिन्दू होने का अपराध


अमेरिका और पोप शासित इण्डिया में  जहाँ ११० करोड़ हिन्दू जनसँख्या है,हिन्दुओं का दमन और उन पर अत्याचार कभी सुर्खियाँ नहीं बन सकता, मगर बात अभी पाकिस्तान से आये १५० हिन्दुओं की है जो हिन्दुस्थान में दर दर भटक रहें हैंपिछले माह पाकिस्तान से १५० हिन्दू तीर्थयात्रा पर आये थे मगर अब ये हिन्दू हिन्दुस्थान से वापस जाने के लिए तैयार नहीं हैऔर यहाँ स्थायी रूप से शरण मांग रहें हैंइसके पीछे पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं पर होने वाला बर्बर अत्याचार हैआये हुए हिन्दुओं के अनुसार पाकिस्तान में उन्हें कभी जजिया कर तो कभी मुश्लिम बनने का दबाव,हत्या ,लूट और फिरौती का दंश झेलना पड़ता था हिन्दू लड़कियों के बलात्कार और बलात मुश्लिम बनाने की घटनाएँ अब आम हो गयी हैये बात पाकिस्तान की सरकार, संसद और मानवाधिकार संघठन भी स्वीकार करने हैंइसके पक्ष का आकड़ा एक ये भी है की विभाजन के समय पाकिस्तान में २५% हिन्दू थे जो अब १.५% के आस पास रह गए हैंखैर ये बात तो पाकिस्तान में होने वाले अत्याचार की हुई जहाँ पाकिस्तानी का मतलब मुसलमान और हिन्दू विरोधी  होना ही होता है,और ये उनके देश का आन्तरिक मामला है उसपर हम एक सीमा से ज्यादा हस्तक्षेप नहीं कर सकते
हिन्दुस्थान (जिसे खान्ग्रेस सरकार ने पोप पोषित इंडिया बना रखा है) में आये हुए पाकिस्तानी हिन्दुओं के साथ होने वाला व्यवहार भी उन्हें अपने यहाँ चलने वाले तालिबानी शासन की ही याद दिलाता हैये १५० हिन्दू जिनमें बच्चे बुजुर्ग महिलाये भी शामिल है इन्होने दिल्ली में शरण ली हैकुछ छोटे स्वयंसेवी संघठनो और इक्का दुक्का समाज सेवको के अलावा कोई भी उनकी सुध लेने वाला नहीं हैखान्ग्रेस अपनी हिंदुविरोधी नीतियों और तुष्टिकरण के कारण इन हिन्दुओं को वापस पाकिस्तान भेजने के लिए अपना पूरा जोर लगा रही हैइन हिन्दुओं की हिन्दुस्थान में शरण पाने की याचिका भी सरकार ने जानबूझकर विचाराधीन रखा हैइसी बिच एक हिन्दू संघटन ने इन्हें उत्तर प्रदेश में शरण दिलाने की कवायद  की तो यू पी पुलिस ने उन्हें रात मे ही मार पिट कर दिल्ली भगा दियाखैर कांग्रेस से हिन्दू विरोध की ही उम्मीद की जा सकती है क्यूकी इस पार्टी का इतिहास ही है तुष्टिकरण का हैसबसे कष्टप्रद बात ये है की इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संघठन को लकवा मार गया है और भरतीय जनता पार्टी जैसी राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का झंडा उठाने वाली पार्टी ने इस मुद्दे पर कोई पहल करने की जरुरत नहीं समझीहिन्दू  हृदय सम्राट की पदवी पाए हुए माननीय नरेन्द्र मोदी जी भी चुप हैइसका कारण क्या है??
आगामी चुनावों को देखते हुए मुश्लिम वोट बैंक की खातिर राजनितिक पार्टियाँ इन हिन्दुओं को जबरिया पाकिस्तान भेजने से भी गुरेज न करेहाँ अगर ये लोग मुश्लिम होते तो खान्ग्रेस से लेकर भाजपा सब पार्टियों में ईनको हिन्दुस्थान में शरण दिलाने की होड़ लग जाती शायद भारत सरकार को शरणार्थी नीति पर भी एक स्पष्ट रुख अख्तियार करना चाहिएकितना शर्मनाक है की हिन्दुस्थान में ६ करोड़ जेहादी बांग्लादेशियों को बसाने में खान्ग्रेस सरकार को सोचने में जरा भी समय नहीं लगता और सिर्फ १५० हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा हैअसम का उदाहरण ले तो रातो रात ट्रक में बैठकर बंगलादेशी आते है और अगले दिन तक जंगल के जंगल गांव में तब्दील। न कोई शरण देने का झंझट न कोई निरीक्षण..इसका कारण है की वो मुश्लिम है..वो एक वोट बैंक है
इस परिस्थिति में हिन्दुओं को भी आत्म मंथन करने की जरुरत क्या हिन्दुस्थान का हिन्दू इतना निरीह हो गया है की ११० करोण हिन्दू मिलकर १५० भाई बहनों को शरण न दे सके? शायद हम हिन्दुओं की आंतरिक फूट ,तथाकथित सेकुलर होने की होड़ और खान्ग्रेसियों के तलवे चाटने वालों की हिमायत करने की प्रवृत्ति इस का कारण हैकल्पना करे अफजल गुरु के लिए होने वाले विरोध प्रदर्शनों का,देशद्रोही होने के बाद भी एक बड़ा तबका उसे आदर्श मानता हैवैश्विक स्तर पर मुश्लिम लादेन के प्रबल समर्थक भी है मगर अब दूसरी और हिन्दुस्थान में हिन्दू ही कर्नल पुरोहित और प्रज्ञा ठाकुर को आतंकी बता कर अपनी बौधिक चेतना के दिवालियेपन और हिन्दुओं की नपुंसकता का परिचय देते रहते है
अगर अब भी हिन्दुओं ने नपुंसकता नहीं छोड़ी तो आज १५० पाकिस्तानी हिन्दू दर दर  भटक रहें है कल ११० करोड़ हिन्दुस्थान के हिन्दू आतंकी घोषित कर दिए जायेंगे और बाबर और मीर जाफर की औलादे इस देश पर शासन करेंगीऔर हम अपनी संस्कृति और धर्म के मुगालते में रहते हुए "गर्व से कहो हम हिन्दू है" की छद्म गाथा गाते रहेंगे
आप सभी से अनुरोध है आप जहा कहीं भी हो संवैधानिक मर्यादा में रहते हुए एक पत्र माननीय प्रधानमंत्री जी,राष्ट्रपति जी,अपने जनप्रतिनिधिया जिलाधिकारी किसी को भी किसी माध्यम से,इन हिन्दुओं की सहायता के लिए, लिखें और उन हिन्दुओं की सहायता के लिए प्रयास करते हुए समाज और हिंदुत्व के लिए अपना कर्तव्य पूरा करने की कड़ी में एक छोटा सा प्रयास करें