बुधवार, 8 अक्तूबर 2014

वायु सेना दिवस पर निर्मल जीत सिंह सेखो को नमन

आज वायु सेना दिवस है।भारतीय वायु सेना के समस्त अधिकारीयों जवानों एवं अन्य कर्मचारियों को बधाइयाँ।। वायु सेना दिवस पर एक रोचक और शौर्य से भरा प्रसंग आप सब से साझा करना चाहूँगा।प्रसंग है इंडियन एयर फ़ोर्स के एकमात्र परमवीर चक्र पाने वाले वीर जवान "निर्मल जीत सिंह सेखो" का ।बात सन 1971 की है जब बांग्लादेश मुक्ति को लेकर भारत- पाकिस्तान युद्ध छिड़ा हुआ था। 14 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानियों ने सुबह सुबह छह साइबर जेट F-86 से एक साथ हमला किया।। निर्मलजीत सिंह सेखो उसी बेस पर तैनात और हमले के जबाब के लिए तैयार थे ।उनके साथ उनके साथी फ्लाइंग लैफ्टिनेंट घुम्मन भी कमर कस कर मौजूद थे।आठ बजकर दो मीनट पर पर खतरे का संकेत देख उन्होंने कंट्रोल से उड़ने की इजाजत मांगी और कुछ सेकेण्ड के इन्तजार के बाद जब कंट्रोल ने कोई जबाब नहीं दिया तो निर्मल जीत सिंह सेखो ने बिना कंट्रोल और सीनियर्स के इजाजत उडान भर दी और पाकिस्तानीयो के जहाज को अपने फाइटर से  दौड़ा दिया।अगले दो मिनट में निर्मलजीत सिंह सेखो और उनके मित्र घुम्मन आसमान में छह विमानों से लोहा ले रहे थे।इसके तुरंत बाद एक पाकिस्तानी जेट ने हवाई अड्डे पर बम गिराया एक और जहाज उसके साथ में था। निर्मल जीत सिंह ने अपना जहाज उन दोनों जेटो के पीछे लगा दिया और रेडियो सन्देश भेजा  ..
"मैं दो साइबर जेट जहाजों के पीछे हूँ...मैं उन्हें जाने नहीं दूँगा..."
और चंद सेकंडो बाद बड़ा धमाका हुआ और बम गिराने वाला पाकिस्तानी साइबर जेट आग के गोले में बदल चुका था।।
इसी समय निर्मलजीत सिंह सेखों का अगला संदेश आया :
'मैं मुकाबले पर हूँ और मुझे मजा आ रहा है। मेरे इर्द-गिर्द दुश्मन के दो साइबर जेट हैं। मैं एक का ही पीछा कर रहा हूँ, दूसरा मेरे साथ-साथ चल रहा है।'
कुछ देर बाद दूसरा धमाका हुआ और एक बड़े धमाके के साथ दूसरा पाकिस्तानी साइबर जेट भी ढेर हो गया।
इसके थोड़े ही देर बाद उनका एक आखिरी सन्देश सुना गया
'शायद मेरा नेट भी निशाने पर आ गया है. घुम्मन, अब तुम मोर्चा संभालो।
इसके बाद उन्होंने अपने जलते हुए फाइटर को सीधा रखते हुए लैंड करने की कोशिश की मगर विमान का  कंट्रोल सिस्टम अचानक फेल हो गया और विमान पहाड़ियों में जा गिरा अंतिम क्षणों में फ़्लाइंग अफसर निर्मलजीत सिंह सेखो ने इजेक्ट का आखिरी प्रयास किया मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थो और निर्मलजीत सिंह फाइटर प्लेन समेत पहाड़ियों में जा गिरे।।सेना और वायुसेना के तमाम आपरेशनो के बाद भी इस अमर बलिदानी का शव पहाड़ियों में नहीं ढूंढा जा सका।।
अदभुत पराक्रम एवं शौर्य तथा कर्तव्य के प्रति निष्ठां एवं रणभूमि में सर्वोच्च वीरता के प्रदर्शन के कारण मरणोपरांत इन्हें हिंदुस्थान का सबसे बड़ा सैनिक पदक "परमवीर चक्र" दिया गया।
विडंबना की बात ये भी रही की बिना आदेश मिले जहाज उड़ाने के कारण "कोर्ट आफ इन्क्वायरी" भी हुई जिसे मात्र एक खानापूर्ति तक सिमित रक्खा गया।
पाकिस्तानी पाइलेट "सलीम बेग मिर्जा" ,जिसने उनके विमान पर निशाना लगाया था, ने बाद में एक पुस्तक और कई स्थानीय आर्टिकल्स में निर्मलजीत सिंह सेखो के रणकौशल की भूरी भूरी प्रसंशा की।।
वायु सेना दिवस पर ऐसे सभी अमर बलिदानियों को श्रधांजलि एवं नमन।।

रविवार, 5 अक्तूबर 2014

क्या इराक में शिया मुसलमानों और यजिदियों की नृसंश हत्या करने वाले ISIS के हिंदुस्थानी जेहादियों को हिन्दुस्थान वापसी पर माफ़ी देनी चाहिए??

क्या इराक में शिया मुसलमानों और यजिदियों की नृसंश हत्या करने वाले ISIS के हिंदुस्थानी जेहादियों को हिन्दुस्थान वापसी पर माफ़ी देनी चाहिए??
मोदी सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जेहादी तुष्टिकरण की प्लानिंग करते हुए इराक से वापस आने वाले हत्यारे ISIS के भारतीय आतंकियों पर FIR न दर्ज करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। हालांकि अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।राजनाथ का तर्क है की ऐसा करके इन युवको की कट्टर सोच बदली जाएगी। इससे कुछ प्रश्न उठते हैं।

# कांग्रेस सिर्फ मुश्लिम तुष्टिकरण एवं मुसलमानों को बेवकूफ वोटो के लिए बना रही थी मगर राजनाथ सिंह जेहादी आतंकवाद का तुष्टिकरण कर रहे हैं एक कदम आगे बढ़ते हुए।
# आतंकवादी युवको को सजा देने की जगह उनको बढ़ावा देना समाज में अन्य आतंकियों को अपराध करने के लिए प्रवृत्त करेगा।
# इस निर्णय से जेहादी तंजीमो को हिन्दुस्थान में बेस बनाने में नैतिक मदद मिलेगी।
# एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण बिंदु बिदेश नीति से सम्बंधित है। हम पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करते हैं की उसकी जमीन से हमारे देश में आतंक फैलाया जा रहा है।  क्या विश्व बिरादरी और इराक ये आरोप नहीं लगायेंगे की हिन्दुस्थान की जमीन से आतंकवादी ईराक में नरसंहार और आतंकवाद हेतु भेजे जा रहे हैं?? भारत में उन पर FIR तक दर्ज न करके हिन्दुस्थान पाकिस्तान की तरह ही आतंकियों को संरक्षण दे रहा है। क्या ये अंतर्राष्ट्रीय अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा??
# गृहमंत्री जी जिन जेहादियों को आप भारत में रेड कारपेट दे रहे हैं उन्होंने इराक में सैकड़ो गैर मुसलमानों और शियाओं का गला काटा है,सैकड़ो महिलाओं का रेप किया है। क्या गारंटी है आप की इस जेहाद सदभावना योजना के बाद पुलिस से मुक्त होकर वो यहाँ के गैर मुसलमान हिन्दुओं के साथ ऐसा नहीं करेंगे??यदि उन्होंने यहाँ भी 100-50 हिन्दुओं या सिक्खों के गले रेत दिए या आप का आशीर्वाद पा के कुछ हिन्दू लड़कियों का सामूहिक बलात्कार कर दिया तो इसकी जिम्मेदारी आप का शासन प्रशासन किसकी तय करेगा?? उस समय किस प्रकार की और किस फैक्ट्री की बनी कालिख आप अपने मुह पर पोतेंगे और किस फैक्ट्री वाली मोदी जी को गिफ्ट करेंगे।।
# माननीय गृहमंत्री महोदय क्या आप को पृथ्वीराज चौहान का इतिहास नहीं पता उन्होंने भी मुहम्मद गोरी जैसे सांप को माफ़ी देकर दूध पिलाया था और उसके बाद गोरी ने क्या किया पूरा विश्व जानता है। आप भी सांप को दूध पिलाना छोडिये और ऐक्शन लीजिये।
# बेहतर हो इन आतंकियों को इराकी सरकार को सौप कर भारत सरकार भारत को इन आतंकियों से मुक्त रक्खे। वापस आ के ये गंध ही फैलायेंगे। दूसरा अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में भी सन्देश जायेगा की हिन्दुस्थान की जमीन से आतंकवाद का पोषण नहीं होता है।।
# एक अन्य बात गृहमंत्री महोदय चाहे आप कितना भी गुलाटी मारे कितना भी जिहाद को समर्थन दें ,तथाकथित शांतिदूत भाजपा,मोदी और आप के मुह पर थूकते थे,थूकते हैं और थूकते रहेंगे।। मगर जो लोग आप के समर्थन में उसे मत खो दीजियेगा अन्यथा धोबी के कुत्ते वाली कहावत तो आप ने सुनी ही होगी...

आशुतोष की कलम से
#beinghindu

लव जिहाद: जिम्मेदार कौन मुसलमान या हिन्दू लड़कियां??

महिलाओं के सन्दर्भ से ये पोस्ट थोड़ी बोल्ड है अतः इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ। यदि आप मानसिक रूप से परिपक्व हैं तो ही इसे पढ़ें या विचार दें अन्यथा समय बर्बाद न करें।।आज कल हिन्दू महिलाओं के एक नए शत्रु के रूप में 'लव जेहाद' शब्द आया है। लव जिहाद के लिए सामन्यतया मुसलमान लड़के को जिम्मेदार बता उसे गाली दे कर या पीट -पाट कर धर्मरक्षक बन जाते हैं।। मगर कुछ तथ्य अपने गिरेबान में झाँकने वाले हैं।
# मेरा सामाजिक अनुभव ये है की किसी भी धर्म के लड़के लड़की का affair यदि है तो विवाह में परिणित होने से पहले लगभग 85-90% केस में सेक्स या शारीरिक सम्बन्ध बन चुके होते हैं।

# कोई लव जेहादी यदि किसी हिन्दू लड़की को फसाता है तो ये आकंडा 99/100 हो जाता है और वो पहले ही दिन शादी तो करेगा नहीं पहले हिन्दू बन के बात करना,शापिंग पिक्चर और अन्य सभी केस की तरह शादी से पहले सेक्स..

# अब आप सोचे की जब वो हिन्दू लड़की मुसलमान लड़के के साथ सेक्स करती होगी तो आँख मूंद के सब कुछ तो होता नहीं होगा। और यदि आँख खुली है तो शायद पहले दिन शुरुवाती 10 मिनट में उसे पता चल जायेगा की लड़का हिन्दू है या मुसलमान...

# अब जब उस हिन्दू लड़की को मालूम हो गया की जिसके साथ वो सोयी वो मुसलमान है और झूठा है फिर भी तारा सहदेव की भांति उससे विवाह करे और बाद में इश्लामिक रितियों के कारण(किसी हिन्दू लड़की के लिए वो रीतियाँ अत्याचार ही होंगी) होने वाले अत्याचार पर कहे की उसे मालूम नहीं था लड़का हिन्दू था या मुसलमान तो उस लड़की की गलती नहीं है???

# भाइयों ध्यान से सोचें इसमें गलती हमारी ज्यादा है जो हमारी लड़कियां थोड़े से सुविधा हेतु झांसे में आ के किसी के बिस्तर पर चली जा रही है  और हम तारा सहदेव केस जैसे लकीर पिटते रह जाते हैं।।वैसे भी हमने  बिटिया के आदर्श के रूप में वेश्याओं को टेलीविजन के माध्यम से बेडरूम तक बुला लिया है तो वो झाँसी की रानी बनने से रही पूनम पांडे टाइप आदर्श रक्खेगी।

# समाधान हम सब को मिल के निकालना होगा। कैसे निकलेगा नहीं मालूम मगर लव जेहादियों को कोस कर तो स्थायी समाधान नहीं प्राप्त होगा ये निश्चित है।।
नोट: इस समसामयिक पोस्ट को कोई व्यक्तिगत रूप से न ले और न ही किसी के व्यक्तिगत सन्दर्भ में टिपण्णी दे। आप के सुझावों का स्वागत है।

आशुतोष की कलम से

स्वछता अभियान का एक प्रयास आप भी करें

मित्रों सामन्यतया आज कल हम जिस कलम से लिखते हैं उसका रिफिल ख़त्म होने के बाद उसे फेंक कर नया पेन लाते हैं। इससे पेन के रूप में वातावरण में E-कूड़ा इकठ्ठा होता रहता है।। मैंने कुछ महीनो से एक नया प्रयोग किया है। घर में जिस भी कलम का इंक ख़तम हुआ उसे न फेंक कर इकठ्ठा करता हूँ और उसकी रिफिल (जो लगभग 1 से 1.5 रूपये की होगी) ला कर उस पेन को रास्ते में मिलने वाले या आस पास के किसी गरीब बच्चे(जिसके लिए पेन खरीदना एक बड़ा कार्य होता है) को दे देता हूँ। इससे दो बाते होती है।।
# पेन को कूड़े के रूप में जाने से बचा कर मैं वातावरण परिवेश की स्वच्छता सफाई रखता हूँ।( जरुरी नहीं झाड़ू से ही सफाई हो)
# एक needy बच्चे तक पेन पहुचाकर उसके विकास में अंशमात्र की भागीदारी प्राप्त कर संतुष्ट होता हूँ।।
*** अभियान सिर्फ सरकारों के भरोसे नहीं चलते अपने आस पास देखें ऐसे हजारो तरीके मिल जायेंगे। अपने मूल अधिकारों के साथ साथ राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों को भी समझें।।।
इस पोस्ट को लाइक शेयर या कमेन्ट की जगह इसे अपने जीवन में उतारिये मेरा प्रयास ज्यादा सफल होगा....

आशुतोष की कलम से

#beinghindu

शनिवार, 4 अक्तूबर 2014

क्या राम ने सीता का त्याग किया था?शुद्र तपस्वी शम्बुक वध क्यों??

एक अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण एवं आवश्यक जानकारी मुझे @saffron ने whats app पर भेजी है जिसे कुछ editing के साथ आप सब से साझा कर रहा हूँ।।प्रभु श्री राम के सन्दर्भ में कुछ भ्रांतियां अर्थात गलत बाते फैलाई गयी हैं उनका तार्किक निवारण..कृपया अपना कुछ मिनट दे कर इसे समझे जिससे आप धर्मद्रोहियों के झांसे न फसने पाएंगे..

भ्रान्ति: क्या श्रीराम जी शूद्र विरोधी थे? क्या उन्होने शंबूक का वध किया था ? क्या उन्होने गर्भवती सीता को छोड़ दिया था? क्या उनका या उनके भाइयों का लवकुश से युद्ध हुआ था? क्या सीता जी धरती मे समा गई थी??
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निवारण: आजकल 2 पुस्तकें रामायण के नाम से जानी जाती है........ 1.वाल्मीकि रामायण 2.तुलसीदास जी की रामचरित मानस। इसमे से वाल्मीकि रामायण श्रीराम जी के समय मे लिखी गई है। आजकल प्राप्त वाल्मीकि रामायण मे 7 काण्ड (Chapter) हैं। अंतिम काण्ड उत्तर काण्ड है।
तपस्वी शंबूक का वध , लवकुश से युद्ध तथा गर्भवती माता सीता जी का त्याग दोनों इसी काण्ड मे आते है। परंतु सच्चाई यह है कि महर्षि वाल्मीकि ने जो रामायण लिखी थी उसमे 6 काण्ड ही थे। सातवा उत्तर काण्ड बाद मे (17 वी -18 वी शताब्दी मे ) मिलाया गया है। क्योकि उत्तर काण्ड महर्षि वाल्मीकि जी की रचना नहीं है इसलिए श्रीराम जी को तपस्वी शम्बूक का हत्यारा नहीं कहा जा सकता. उन्हें गर्भवती स्त्री माता सीता जी के त्याग का अपराधी भी नहीं कहा जा सकता. अतः सनातन धर्म के आदर्श मर्यादा पुरूषोंत्तम श्रीराम जी को बदनाम करने के लिए किसी दुष्ट ने ये उत्तर काण्ड बाद में मिलाया है. इसके निम्नलिखित प्रमाण हैं।
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1- “THE ILIAD OF THE EAST” “दी इलियड ऑफ दी ईस्ट” रामायण का इंगलिश मे संक्षिप्त अनुवाद है जो FREDERIKA RICHARDSON ने किया था। इसे MACMILLAN AND CO ने 1870 मे प्रकाशित किया था। इसमे केवल पहले 6 काण्डों का ही विवरण है। यदि इस अनुवादक के सामने उत्तरकाण्ड होता तो क्या वह उत्तरकाण्ड का अनुवाद न करता।
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2 RALPH T. H. GRIFFITH ने 1874 में रामायण का इंगलिश मे अनुवाद किया है। इसे लंदन मे TRUBNER AND CO ने तथा भारत मे बनारस मे Lazarus And Co ने छापा था। इसमे भी पहले 6 भागों का अनुवाद है। युद्धकाण्ड के अंत मे अनुवादक उत्तरकांड के विषय मे लिखता हैं –
The Ramayan ends epically complete, with the triumphant return of Rama and his rescued queen to Ayodhya and his consecration and coronation in the capital of his forefathers. Even if the story were not complete, the conclusion of the last canto of the sixth Book evidently the work of a later hand than Valmiki’s, which speaks of Rama’s glorious and happy reign and promises blessings to those who read and hear the Ramayan, would be sufficient to show that, when these verses were added, the poem was considered to be finished.
अर्थात एक महाकाव्य के रूप मे रामयण विजयी राम की अपनी रानी को बचाने और अपने पूर्वजो की राजधानी मे राज्याभिषेक के साथ पूरी हो जाती है। छठे अध्याय के अंतिम खंड मे वाल्मीकि राम के गौरवशाली और खुशाहाल शासन की बात करते हैं और उनके लिए आशीर्वचन कहते हैं जो रामायण को पढ़ते और सुनते हैं। इससे यह निश्चित हो जाता है कि महाकाव्य यहाँ समाप्त हो जाता है। उत्तरकाण्ड बाद की रचना है जो किसी दूसरे द्वारा लिखी गई है।
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3 – वाल्मीकि रामायण की संस्कृत में 3 टीका मिलती है. उसमे से सबसे मुख्य तथा पुरानी टीका श्री गोविन्दराज जी की है. गोविन्दराज जी ने अपना व् अपने गुरु का परिचय बालकाण्ड में रामयण के आरम्भ में तथा युद्ध काण्ड के अंत में दिया है. बिच में कहीं पर ही अपना परिचय नहीं दिया है. यदि गोविन्दराज जी के सामने उत्तर काण्ड होता तो वह अपना परिचय युद्ध काण्ड ने न देकर उत्तर काण्ड में देते.
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4-सन 1900 के आसपास तक जो भी गोविन्दराज की टीका सहित वाल्मीकि रामायण छपी है उनमे उत्तरकाण्ड की टीका नहीं है. परन्तु 1930 के संस्करण में गोविन्दराज की उत्तर काण्ड पर टीका मिलती है.उसके उत्तर काण्ड पर जो टीका दी गई है वह पिछले 6 काण्डों की टीका से बिलकुल अलग है और उत्तर काण्ड को रामायण का हिस्सा दिखाने के लिए बनाई है.
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5 भारत में वाल्मीकि रामायण को आधार बना कर कई प्रादेशिक भाषाओं में रामायण लिखी गई है. जैसे कम्ब रामायण (तमिल में), रंगनाथ तेलुगु (तेलुगु में), तोरवे रामायण (कन्नड़ में) तथा तुलसीदास जी की रामचरित मानस (अवधि में). अब हम क्रम से इन पर विचार करते है.
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[1]- कम्ब रामायण – इसका रचना काल लगभग बारहवी शताब्दी है. संस्कृत से भिन्न उपलब्ध भाषाओ में यह सबसे पुरानी रामायण है. इसके लेखक महाकवि कम्बन है. इसकी मूल भाषा तमिल है. अब तक इसके हिन्दी में (पहला अनुवाद 1962में बिहार राजभाषा परिषद् ) कई अनुवाद हो चुके है. इसमें भी बालकाण्ड से लेकर युद्धकाण्ड तक 6 ही काण्ड है. यह भी भगवान् श्रीराम जी के राज्य अभिषेक व् श्री राम जी द्वारा दरबार में सभी के लिए प्रशंसा वचन के साथ पूरी होती है. यह बहुत अधिक वाल्मीकि रामायण से मिलती है. यदि महाकवि कम्बन जी के सामने वाल्मीकि रामायण में उत्तर काण्ड होता तो वह इसका वर्णन जरुर करते. परन्तु उनके सामने जो वाल्मीकि रामायण उपलब्ध थी उसमे 6 काण्ड ही थे.
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[2] रंगनाथ रामायण – इसका रचना काल लगभग 1380 इस्वी है. इसकी भाषा तेलुगु है परन्तु अब इसका हिंदी में अनुवाद (1961 में बिहार राजभाषा परिषद द्वारा) चुका है. यह रामायण श्रीराम जी के राज्य अभिषेक व् दरबार के दृश्य के साथ पूरी हो जाती है . इसमें बालकाण्ड से लेकर युद्ध काण्ड तक 6 काण्ड है. यदि इसके रचियता के सामने उपलब्ध वाल्मीकि रामायण में उत्तर काण्ड होता तो वह अवश्य ही उसका उल्लेख करते परन्तु उनके सामने जो वाल्मीकि रामायण उपलब्ध थी उसमे 6 काण्ड ही थे. *
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[3]- तोरवे रामायण - इसका रचना काल लगभग 1500 इस्वी है. इसकी मूल भाषा कन्नड़ है परन्तु अब इसका हिंदी में अनुवाद चुका है. इसके लेखक तोरवे नरहरी जी है. यह रामायण श्रीराम जी के राज्य अभिषेक, सुग्रीव आदि को विदा करना, रामराज्य में सुख शान्ति, दरबार के दृश्य तथा रामायण पढने के लाभ के वर्णन के साथ पूरी हो जाती है . इसमें बालकाण्ड से लेकर युद्ध काण्ड तक 6 काण्ड है. यदि इसके रचियता के सामने उपलब्ध वाल्मीकि रामायण में उत्तर काण्ड होता तो वह अवश्य ही उसका उल्लेख करते परन्तु उनके सामने जो वाल्मीकि रामायण उपलब्ध थी उसमे 6 काण्ड ही थे.

कृपया इसे आप सभी से किसी न किसी माध्यम से साझा जरुर करें।।
जय श्री राम

#beinghindu

बुधवार, 1 अक्तूबर 2014

गाँधी को किस रूप में याद करें

गाँधी जयंती पर विशेष: मैं अमर बलिदानी नथूराम गोडसे की विचारधारा से सहमत हूँ और आज भी मेरे घर में दिवार पर नथूराम गोडसे की तस्वीर ही लगी है। मगर तस्वीर का एक और पहलू है की हर व्यक्ति में अच्छाईयां और बुराइयाँ दोनों होती है। गाँधी भी एक मनुष्य ही थे। देश के लिए संघर्ष के लिए उन्होंने एक मार्ग चुना जो सही या गलत था इस पर विचार अलग हो सकते हैं मगर संघर्ष किया था उन्होंने।। मेरे समझ से गाँधी का सबसे बड़ा योगदान मृत पड़ी भारतीय जनता के अंतरात्मा को जगाना था। वो एक बड़े नेता थे मगर अपने सामने किसी और नेता के कद को बढ़ने न देने और स्वयं ही सर्वोपरी रहने की महत्त्वाकांक्षा में उन्हें सुभाष जैसे देशभक्त को भी कांग्रेस से किनारे कर दिया।। वो एक हिन्दू थे और धार्मिक भी मगर सर्वस्वीकार्य नेता बनने की लालसा में उन्होंने मुश्लिमो का तुष्टिकरण करना शुरू किया और उनके द्वारा किये गए जघन्यतम कृत्य का भी समर्थन किया।। वो खुद को अहिंसावादी कहते थे और कई बार अंग्रेज सरकार इस अस्त्र से पीछे भी हटी मगर उनकी राजनितिक हिंसा का शिकार भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी हुए।। वो एक संपन्न घर से थे अंग्रेजी तरीके से जीवन यापन कर सकते थे मगर बिदेशी वस्त्रों की होली जलाने के क्रन्तिकारी विचार का प्रसार उन्होंने ही किया। वो अंग्रेजो के अतिथि बन के भारत की बात रखने प्रतिनिधि के रूप में लन्दन जाते थे मगर उन्ही अंग्रेजो के नमक के कानून के विरोध में दांडी मार्च भी निकालते थे।। एक तरफ उनके आदर्श भगत सिंह के जीवन से बड़े हो जाते थे तो दूसरी और नेहरु के सामने वो पुत्रमोह जैसे व्यवहार में फस जाते थे।। खुद को ब्रम्हचारी बताने वाले गाँधी 18-20 साल की उम्र की स्त्रियों के साथ नग्न होक सोना,उन्हें अनावृत करके देखना,उनके साथ नग्न होक स्नान करना अपने ब्रह्मचर्य की कसौटी और प्रयोग मानते थे।। वो सत्य से साक्षात्कार लिखते समय वेश्या के पास जाने तक की बात भी नहीं छिपाते मगर मैमुना बेगम और फिरोज खान को इंदिरा गाँधी और फिरोज गाँधी  बनाने की विवशता पर प्रकाश डालते हुए उनका सत्य तिमिर का वरण करने लगता था।। विभाजित भारत ने उन्हें राष्ट्रपिता माना मगर 55 करोड़ का अनशन पाकिस्तान के लिए उनहोने किया।। वो भारत की आजादी के एक सिपाही थे मगर वो भारत के विभाजन के एक मुख्य अभियुक्त भी हैं। ऊन्होने हिन्दू धर्म को सर्वोच्च बताया मगर लाखो हिन्दुओं के खून के छींटे उनके द्वारा काती गयी खद्दर के ऊपर अमिट कटु स्मृति के रूप में स्थायी रूप से विराजमान हैं।
कुल मिलाकर मैं गाँधी जी को एक आजादी का प्रमुख सिपाही मानता हूँ मगर अंतिम सोपान में अपनी राजनितिक महत्त्वाकांक्षाओं के बलिवेदी पर एक राष्ट्र के दो टुकड़े करने और लाखों  हिन्दुओं की हत्याओं की उत्तरदायित्व भी उनके खाते में लिखा जायेगा।
आप उनको किस रूप में याद करना चाहेंगे ये आप का निर्णय है...

आशुतोष की कलम से