शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर के जन्मदिवस पर विशेष



चित्र: संविधान लिखने वाले कमेटी क सभीे सदस्य (बाबा साहेब प्रथमपंक्ति में मध्य में) 
भारत के पहले कानून मंत्री एवं भारत के संविधान के ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जन्मदिवस् की शुभकामनायें...
संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी एवं बाबा साहेब के जीवन से सम्बंधित कुछ अन्य तथ्य ...
डाक्टर आंबेडकर के अलावा संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी में 6 सदस्य और एक कांस्टिट्यशनल एडवाइजर थे जिनके नाम
● गोविन्द बल्लभ पन्त (उत्तरप्रदेश के प्रथम।मुख्यमंत्री)
● कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी(केएम मुंशी (पूर्व गृह मंत्री बॉम्बे)
● अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर(पूर्व-एडवोकेट जनरल,मद्रास स्टेट)
●एन गोपालस्वामी अयंगर (पूर्व प्रधानमंत्री जम्मू और कश्मीर
● बीएल मित्तर( पूर्व एडवोकेट जनरल-भारत) बाद में जिन्हीने इस्तीफा दिया और माधव राव (वडोदरा के राजा के क़ानूनी सलाहकार) ने इनकी जगह ली
●मोहम्मद सदुल्लाह (असम के पूर्व मुख्यमंत्री)
●डीपी खेतान (खेतान बिजनेस परिवार से और एक बड़े वकील ) उनक़ी मृत्यु के बाद टीटी कृष्णामाचारी ने उनकी जगह ली..
● कांस्टिट्यशनल एडवाइजर सर बेनेगल नरसिंह राव थे जो बाद में इंटरनेशनल कोर्ट आफ जस्टिस में प्रथम भारतीय जज बने)

बाबा साहेब के जीवन के कुछ अन्य तथ्य

◆डाक्टर आंबेडकर ने सामाजिक भेद भाव के विरुद्ध अभियान चलाया। दलितों, श्रमिकों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया।
◆डाक्टर भीमराव आंबेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत थे और उनके पिता, भारतीय सेना की महू छावनी में सेवा में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे। महू छावनी में ही भीमराव का जन्म हुआ..
◆ बाबा साहेब का नाम पहले भीमराव था..उनके एक ब्राह्मण शिक्षक कृष्णा महादेव आंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे, ने उनके नाम में अपना उपनाम ‘आंबेडकर’ जोड़ दिया। तो कृष्णा महादेव ने भीमराव को "भीमराव आंबेडकर" बनाया और आज भी बाबा साहेब को "आंबेडकर" उपनाम से दुनिया जानती है।
◆महाराज बड़ौदा सयाजीराव गायकवाड़ ने छात्र भीमराव अंबेडकर को फेलोशिप देकर बिदेश पढ़ने के लिए भेजा और डॉक्टर अंबेडकर ने वहां अपनी उच्च शिक्षा पूरी की।
◆ 1906 में इनका विवाह हुआ और डाक्टर आंबेडकर की पत्नी का नाम रमाबाई था। सन 1935 में रमाबाई का देहांत हो गया।
◆ "शारदा कबीर नाम की सारस्वत ब्राह्मण से डॉक्टर अंबेडकर ने दूसरा विवाह किया और अपना नया नाम सविता अंबेडकर रख लिया.शारदा कबीर ने अंतिम समय तक बाबा साहेब की सेवा किया.
◆डाक्टर अंबेडकर ने कहा कि हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही
एक हल है । मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं
और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते । (प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१)
◆अपनी मृत्यु से लगभग 52 दिन पूर्व डॉक्टर आंबेडकर ने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया और ब्रम्हा विष्णु महेश और अवतारों के अस्तित्व को नकारते हुए कहा कि मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा...
◆ब्राम्हण उपनाम एवं पत्नी को व्यक्तिगत जीवन में स्वीकार किये डाक्टर आंबेडकर ने अपनी से 52 दिन पूर्व किये धर्म परिवर्तन के समय कहा कि "मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा"।।
आशुतोष की कलम से

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