शनिवार, 15 अप्रैल 2017

कश्मीरी पत्थरबाज जेहादी के सेना की जीप में बांधे जाने वाले वीडियों का सच


भारतीय सेना का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सेना की एक जीप के सामने एक कश्मीरी पत्थरबाज को सेना जीप के बोनट पर बांध के घुमा रही है. देखकर अद्भुत शांति मिली और सबने समर्थन भी किया..इससे पहले जम्मू और कश्मीर में चुनाव के समय सेना पर के जवानों पर हमले की,पत्थरबाजी की,थप्पड़ मारने की और लात से मारने के वीडियो सामने आ चुके थे.. कश्मीरी पत्थरबाज को जीप के बोनट पर बांध के घुमाने वाले वीडियो का सबसे पहले विरोध करने वालों में  जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला थे अब इस घटनाक्रम की पूरी और सत्य जानकारी जान लीजिए जिसका सन्दर्भ लेखिका सूचि सिंह कालरा द्वारा स्थानीय जवानों व्यक्तियों से अनौपचारिक बातचीत है.
यह वीडियो जम्मू और कश्मीर के बड़गांव का है जो कि 9 अप्रैल 2017 को रिकॉर्ड किया गया है.
9 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर में उपचुनाव हो रहे थे और एक बूथ पर पत्थरबाज जेहादियों की भीड़ ने हमला कर दिया. इस बूथ की सुरक्षा ITBP के जवान और जम्मू कश्मीर के पुलिस लोग कर रहे थे।पोलिंग खत्म होने के समय लगभग 900 पत्थरबाज जेहादियों  ने पोलिंग बूथ की सुरक्षा में लगे जवानों पर हमला कर दिया..  प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उनके हाथ में बड़े बड़े पत्थर थे,और वह उसे ITBP और जम्मू कश्मीर के पुलिस के जवानों के ऊपर फेंक रहे थे..अब 900 जेहादियों  की भीड़ और उन से लोहा लेने के लिए आईटीबीपी और जम्मू कश्मीर के सिर्फ नौ जवान..आईटीबीपी के जवानों ने यह जान लिया कि अगर वह कुछ नहीं करते हैं,तो वह जिंदा नहीं बचेंगे..पत्थरबाज किस प्रकार भारतीय सेना का अपमान करते हैं या उन पर हमला करते हैं या आप पूर्व के वीडियो में देख चुके हैं कि किस प्रकार पत्थरबाज भारतीय सेना के सशस्त्र जवानों को थप्पड़ मार रहे हैं और उन पर लात चला रहे हैं ..
जवानों ने इस स्थिति को बिगड़ता देख, नजदीकी आर्मी स्टेशन के कमांडर को एक SOS  मैसेज भेजा,,आर्मी कमांडर ने तुरंत ही एक 17 जवानो की क्विक रिस्पांस टीम(QRT) को एक जीप और एक बस के साथ भेजा... 900 जेहादियों की भीड़ पोलिंग बूथ के बाहर खड़ी थी जो उन और ITBP और जम्मू कश्मीर के जवानों को मार डालना चाहती थी... जब क्यूआरटी की टीम उन नौ जवानों के सहयोग के लिए वहां पहुंची तो उन्हें भी यह समझ में आ गया कि 17 लोगों की क्यूआरटी टीम 900 लोगों की भीड़ से नहीं निपट सकती,जो हाथों में पत्थर और हथियार लेकर खड़े हैं...
कमांडर ने यह सोचा कि यदि इस भीड़ पर फायरिंग की जाती है तो,कई लोग मारे जाएंगे परिस्थितियां और बिगड़ेगी. क्यूआरटी टीम के कमांडर के सामने अपने 17 क्यूआरटी टीम के जवानों के साथ-साथ बूथ के अंदर फंसे नौ आईटीबीपी और जम्मू और कश्मीर पुलिस के जवानों को बचाने की भी जिम्मेदारी थी..मांडर ने एक स्मार्ट डिसीजन लेते हुए उन पत्थरबाजों में से एक पत्थर बाज को पकड़ा और जीप के बोनट पर बांध दिया.. कमांडर का यह तरीका कामयाब हुआ क्योंकि आर्मी की जीप  पर जेहादियों का एक साथी बंधा  हुआ था ,अतः 900 लोगों में से किसी ने भी उस जीप पर पत्थरबाजी नहीं की और QRT टीम के 17 सदस्य, आईटीबीपी और जम्मू और कश्मीर पुलिस के 9 सदस्य जीवित अपने नजदीकी सेना के बेस पर पहुंच गए...कमांडर की सूझबूझ से फायरिंग का आदेश नहीं देना पड़ा जिससे कि कई पत्थरबाज जेहादियों की भी जान बच गई...

अब उमर अब्दुल्ला और प्रॉस्टिट्यूट मीडिया की गैंग इस वीडियो पर जो स्यापा कर रही है उस चित्र के पीछे की असली कहानी तो अब हमारे सामने है नमन है भारतीय सेना को,जो ऐसे विषम परिस्थितियों में भी अपने सैनिकों के साथ-साथ कश्मीर में भारत के टुकड़े पर ही पल  रहे भारतविरोधी जेहादियों के जीवन की भी चिंता करती है।
आप सभी से अनुरोध है कि कृपया भारतीय सेना के शौर्य और सुझबूझ कि  ये गाथा सबसे शेयर करें जिससे कि अफवाह बाज गिरोहों को भारतीय सेना को बदनाम करने का कोई मौका ना मिले ... जय हिंद

आशुतोष की कलम से

1 टिप्पणी:

  1. सरकार को पत्थर बाजों से निपटने के लिए कड़ा कानून बनाना चाहिए जिससे हमारे जवानों के साथ कोई ऐसा करने की हिम्मत न करे

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